इस्लामिक नववर्ष का प्रारंभ मुहर्रम महीने से होता है. यह इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है. रमजान के बाद यह दूसरा सबसे पवित्र माह है. इस साल मुहर्रम 19 जुलाई से है या 20 जुलाई से? इसका निर्णय मोहर्रम का चांद दिखाई देने पर होता है.

हालांकि आज 19 जुलाई को मोहर्रम का चांद दिखाई नहीं दिया है, इसलिए 20 जुलाई दिन गुरुवार से मुहर्रम का प्रारंभ होगा, जबकि मुहर्रम की 10 तारीख यानि यौम-ए-आशूरा 29 जुलाई शनिवार को होगी.

मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली और शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने ऐलान किया है कि आज आसमान में मुहर्रम का चांद नजर नहीं आया है, इस वजह से 20 जुलाई को मुहर्रम की पहली तारीख होगी. 29 जुलाई को देश भर में यौम-ए-आशूरा मनाया जाएगा.

यौम-ए-आशूरा यानि मुहर्रम के 10वें दिन को मातम का दिन माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करीब 1400 साल पहले मुहर्रम के 10वें दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी.

यौम-ए-आशूरा का इतिहस और महत्व

कर्बला की जंग में उन्होंने इस्लाम की रक्षा के लिए अपने परिवार और 72 साथियों के सा थ शहादत दी थी. यह जंग इराक के कर्बला में यजीद की सेना और हजरत इमाम हुसैन के बीच हुई थी.

शिया समुदाय के लोग मुहर्रम की 1 तारीख से लेकर 9 तारीख तक रोजा रख सकते हैं, लेकिन मुहर्रम की 10वीं तारीख यानि यौम-ए-आशूरा को रोजा नहीं रखते हैं. जबकि सुन्नी समुदाय के लोग मुहर्रम की 9वीं और 10वीं तारीख को रोजा रखते हैं. शिया समुदाय के लोग पूरे मुहर्रम माह में मातम मनाते हैं और काले कपड़े पहनते हैं.

मुहर्रम में कब रखते हैं रोजा

हर साल यौम-ए-आशूरा के दिन शिया समुदाय के लोग ताजिया निकालते हैं. इन ताजियों को कर्बला की जंग के शहीदों के प्रतीक रूप में बनाया जाता है. ताजिए का जुलूस शहर के इमामबाड़े से निकलता है, लोग मातम मनाते हुए कर्बला तक जाते हैं और वहां ताजिए दफन होते हैं. उसके साथ ही जुलूस खत्म होता है.

यौम-ए-आशूरा को निकालते हैं ताजिया